रागमालिका (कुन्नुकुषि कृष्णनकुट्टि )
रागमालिका कुन्नुकुषि कृष्णनकुट्टि पी. राजेश्वरी लक्ष्मी विहार , पेरूरकड़ा (डाक) तिरुवनंतपुरम- 625005 प्रथम संस्करण- 1988, पृष्ठ- 59, मूल्य- 25 रुपए ‘ रागमालिका ’ मिश्रित रंगों वाली उनतीस कविताओं का संग्रह है। कवि के जीवन-परिचय के अनुसार कृष्णनकुट्टि भारतीय स्वाधीनता संघर्ष से प्रभावित होकर हिंदी में लिखने को प्रेरित हुए थे। उनका जन्म गाँधीजी के प्रति निष्ठा रखने वाले परिवार में हुआ था। अपने पारिवारिक संस्कारों के प्रभाव से ही वे हिंदी प्रचारक बने और उन्होंने वर्षों विभिन्न संस्थाओं से जुड़कर राष्ट्रभाषा का कार्य किया। उनका संबंध केरल की प्रसिद्ध हिंदी पत्रिका ‘ केरल ज्योति ’ तथा मलयाळम पत्रिका ‘ रसिकरंजनी ’ से भी रहा। हिंदी प्रचार आंदोलन का प्रारंभ भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के एक कार्यक्रम के रूप में हुआ था और वह अपने जन्म के साथ ही राष्ट्रीय-भावना , भावात्मक-एकता एवं मानवतावादी जीवन-मूल्यों की त्रिवेणी के जल का पान करते हुए बड़ा होने लगा था। गांधी जी ने ऐसे ही हिंदी आंदोलन की कल्पना की थी। भारत के अधिसंख्य हिंदी प्रचारक उस काल में राष्ट्रभाषा के ...